ये पक्षी जीवन भर करता है जलकर मरने की तैयारी मरने के बाद देता है अंडा ।

 ये पक्षी जीवन भर करता है जलकर मरने की तैयारी मरने के बाद देता है अंडा ।


 ककून पक्षी : 

    प्राचीन कहानियों में आप लोगों ने सुना होगा कि जब तानसेन जब गाते थे तो दीप प्रज्वलित हो जाते थे। तो तानसेन को राग की पता कैसे चला तो उनके गुरु जंगल में रहते थे उन्होंने एक दिन देखा कि एक पक्षी बहुत ही मधुर संगीत गा रहा है और उसको वह सुनने लगे देखते देखते ही उसके घोसले में आग लग गई और घोसला जल गया। तो उसी गीत को उन्होंने एक राग के रूप में दे दिया और वही से दीपराग की उत्पत्ति हुई। जिसे के गाने से दीपक जल जाते थे। परंतु सुर लय ताल सब ठीक होना चाहिए। यह प्राचीन काल की बात है। तो कहने का मतलब इतना ही है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने इतनी खोज की है जो आज लुप्त हो चुकी है।

    मान्यता के अनुसार ये पक्षी जीवन भर अकेला रहकर अपना जीवन व्यतीत करता है इसे सहचरी प्राप्त करने का कभी अवसर नहीं मिला।  कहा जाता है की ईश्वर ने ककून की जीवन संगिनी को आज तक नहीं बनाया।  विरही बन कर ये इधर उधर फिरता है और मृत्यु की प्रतीक्षा करता है , यह नर ही होता है मादा नहीं। भगवार की कृपा से यह अपनी आयु समाप्ति के समय को जान लेता है और प्रसन्न हो कर घोसले में गाना गाने लगता है।  


    यह राग दीपक गाता है जिस से चारो और अग्नि प्रकट होती है और घोसला जलकर रख हो जाता है, वह स्वयं भी खुद को इसी अग्नि में जला देता है और केवल अपनी दुखद स्मृति में संसार छोड़ जाता है। 
    

पावस आने पर काले मेघ वर्षा करते है उसके जले हुए शरीर की रख शीतल होती है और एक सुन्दर अंडे को जन्म देती है।  कुछ दिन बाद इसी अंडे से एक नर ककून जन्म लेता है। 

अरबी में इस पक्षी को ककनस और फ़ारसी में आतशजन  कहते है। 




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